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शरीर के लिए फलदायी होगा फलाहार




नवरात्र में अगर व्रत कर रही हैं तो इसे अपनी सेहत की बेहतरी का मौका भी बनाइए। कैसे करें व्रत ताकि ऊर्जा की कमी बिल्कुल ना महसूस हो, आइए जानें

उत्सव, उल्लास, आत्मिक शांति, आध्यात्मिक सजगता...इन सब भावनाओं का एक साथ अहसास होता है नवरात्र के दौरान। मां दुर्गा की आराधना की ओर अपनी सारी ऊर्जा एकाग्र करने के लिए अमूमन लोग नवरात्र के दौरान व्रत रखते हैं। तो कुछ लोग नवरात्र को मां की आराधना के साथ-साथ अतिरिक्त कैलोरी खर्च करने के मौके के रूप में भी देखते हैं। व्रत रखने की आपकी वजह जो भी हो, पर इस बात को हमेशा ध्यान में रखें कि व्रत सेहत की कीमत पर नहीं रखा जाना चाहिए। आप ऊर्जा से भरपूर रहेंगी तभी मां की आराधना की ओर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर पाएंगी। अगर आप ऐसा करने में सफल हो पाएंगी तभी मां की आराधना के माध्यम से आपकी शारीरिक और मानसिक शुद्धि संभव हो सकेगी। व्रत में किन बातों को ध्यान में रखना जरूरी है ताकि आप पूरी एकाग्रता से मां अंबे की आराधना कर सकें, आइए जानें:

खुद पर न डालें काम का बोझ

आप कामकाजी हों या फिर गृहिणी, नवरात्र के दौरान अपने ऊपर काम का अतिरिक्त बोझ डालने से बचें। घर और ऑफिस के कामकाज का शेड्यूल तय करें और उससे ज्यादा काम करने से बचें। व्रत के दौरान थकान का शिकार होने से बचें। नवरात्र के व्रत का उद्देश्य शरीर के साथ-साथ मन को भी आराम देना और भीतर से शुद्ध करना होता है। अगर आप इस दौरान भी खुद को काम के बोझ से लाद देंगी तो न सिर्फ नवरात्र खत्म होते-होते आपकी सेहत बिगड़ जाएगी, बल्कि आप पूजा-पाठ पर अपना पूरा ध्यान भी केंद्रित नहीं कर पाएंगी। नियमित अंतराल पर फलाहार लेती रहें, ताकि इसका असर आपकी कार्यक्षमता पर न पड़े।

न करें तरल पदार्थ से समझौता

निर्जला व्रत करने से आप मां की बेहतर तरीके से आराधना कर पाएंगी, अगर यह सोच आपकी भी है तो इसे बदलने की जरूरत है। आप सेहतमंद रहेंगी, खुश रहेंगी और ऊर्जा से भरपूर रहेंगी, तभी पूजा-आराधना में अपना पूरा ध्यान लगा पाएंगी। अगर आप निर्जला व्रत नहीं कर रही हैं तो व्रत के दौरान भी तरल पदार्थों से समझौता करने की गलती न करें। नियमित अंतराल पर पानी पीती रहें। पानी के अलावा नारियल पानी, ग्रीन टी, छाछ और नींबू-पानी भी व्रत के दौरान आपकी सेहत दुरुस्त रखेंगे। नींबू के शर्बत में आप सेंधा नमक भी मिला सकती हैं। ऐसा करने से आपको कमजोरी महसूस नहीं होगी।

बचें एसिडिटी से

लंबे समय तक कुछ न खाने से एसिडिटी होने की आशंका काफी ज्यादा बढ़ जाती है। अगर आप नवरात्र के व्रत में सिर्फ एक बार ही रात में संतुलित खाना खाती हैं, तो एसिडिटी से बचने के लिए नियमित अंतराल पर फल या मेवे खाएं। बीएल कपूर हॉस्पिटल में चीफ डाइटीशियन, सुनीता रॉय चौधरी के अनुसार, ‘व्रत के दौरान एसिडिटी से बचने के लिए ऐसे खाद्य पदार्थ खाने चाहिए जिन्हें खाने के बाद पेट लंबे समय तक भरा रहे और आपको पर्याप्त ऊर्जा भी मिले।’ खजूर खाएं। यह शुगर, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम और मैग्नेशियम का अच्छा स्रोत है। बादाम प्रोटीन और फाइबर का स्रोत है। बादाम के पाउडर को दूध में मिलाकर भी आप पी सकती हैं। केला खाएं। यह कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम और मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत है। विभिन्न शोधों के मुताबिक दोपहर में एसिडिटी तेजी से बढ़ती है। इस वक्त तक खाली पेट न रहें। कोई फल या मेवा जरूर खा लें।

व्रत के खानपान का विज्ञान

कभी आपने यह सोचकर देखा है कि आखिर ऐसा क्यों है कि कुछ खास खाद्य पदार्थ यों तो हम नहीं खाते, पर व्रतों में वही हमारे मुख्य आहार बन जाते हैं। सामान्य नमक की जगह व्रत के दौरान सेंधा नमक खाने से आखिर क्या फर्क पड़ता है? धार्मिक आधार पर कहा जाए तो लोग व्रत इसलिए रखते हैं ताकि वो धार्मिक रूप से शुद्ध हो जाएं और अपनी सहनशक्ति जांच सकें। यही वजह है कि व्रत के दौरान हम सामान्य खाद्य पदार्थों का त्याग करते हैं। नवरात्र साल में दो बार मनाया जाता है और इस दौरान मौसम बदल रहा होता है। आयुर्वेद के मुताबिक बदलते मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता कमजोर होती है और इस समय मीट, अनाज, शराब, प्याज, लहसुन आदि का सेवन करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। आयुर्वेद बदलते मौसम में इस तरह के खाद्य पदार्थों से दूर रहने की सलाह देता है। कई लोग व्रत को डिटॉक्स के मौके के रूप में देखते हैं और इस दौरान प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूर रहते हैं।

 

नौ दिन-नौ टिप्स

व्रत के दौरान दिन भर में सिर्फ एक बार खाना खाने से बेहतर है कि कम-कम मात्रा बार कई बार फलाहार खाएं। इससे ग्लूकोज का स्तर ठीक रहेगा और दिन भर आपकी ऊर्जा बरकरार रहेगी।

व्रत में ढेर सारे फल खाएं। फलों से आपको ऊर्जा और फाइबर भी मिलेंगे।

वैसे तो व्रत से जुड़ी अधिकांश रेसिपी बहुत ज्यादा तली-भुनी होती हैं, पर तलने की जगह आप अपनी रेसिपी को बेक, रोस्ट या ग्रिल करने की कोशिश ज्यादा करें।

ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों जैसे आलू और साबुदाना आदि के साथ ज्यादा फाइबर वाले खाद्य पदार्थ जैसे शिमला मिर्च, पत्ता गोभी या पालक आदि खाने की कोशिश करें।

चौलाई प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत है और आप इसे अपने व्रत वाले मेन्यू में शामिल भी कर सकती हैं। आप इसे दूध के साथ पकाकर खीर बना सकती हैं या फिर पूरी या परांठा भी बना सकती हैं।

कुट्टू के आटा को भी व्रत के दौरान अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। इसमें 70 से 75 प्रति कार्बोहाइड्रेट और 20 से 25 प्रतिशत तक प्रोटीन होता है।

सामक चावल भी व्रत के लिए अच्छा विकल्प है। खास बात यह है कि यह आसानी से पच भी जाता है।

अगर मीठा पसंद है तो व्रत की डाइट में फल, रायता, खजूर, सेब का खीर या फिर सामक का खीर भी शामिल कर सकती हैं।

व्रत वाले स्नैक्स की बाजार में अब भरमार है। अगर अपनी सेहत की चिंता है तो इन स्नैक्स से बचकर रहें। इनमें नमक और वसा के अलावा कुछ और नहीं होता। बेहतर होगा कि आप व्रत के दौरान स्नैक्स के रूप में भुना हुआ मखाना, भुनी मूंगफली या सूखे मेवे खाएं।

 व्रत में एसिडिटी से बचने के लिए ऐसे पदार्थ खाने चाहिए जिन्हें खाने के बाद पेट लंबे समय तक भरा रहे और पर्याप्त ऊर्जा मिले।

 ये हैं मां के नौ दिन के नौ पसंदीदा भोग

 यकीनन मां भगवती के स्वागत और उनके पूजन की तैयारियां आप पहले से ही कर रही होंगी। एक जरूरी बात है, देवी का भोग। देवी मां आपकी पूजा-अर्चना से कितनी प्रसन्न होंगी, यह इस बात पर भी निर्भर करता है। भोग पूजन तिथि और देवी की पसंद के हिसाब से लगाया जाए तो बेहतर होता है। तो चलिए जानते हैं, देवियों और उनके पसंदीदा भोग के बारे में।घी से होती है शुरुआत

नवरात्र का पहला दिन मां शैलपुत्री का होता है। ऐसी मान्यता है कि हिमालय राज की पुत्री मां शैलपुत्री को सफेद रंग पसंद है। इस दिन मां भगवती को शुद्ध देसी घी का भोग लगाया जाता है। जानकारों की मानें तो यह भोग भक्तों को निरोगी रखता है और उनके सारे दुख खत्म कर देता है।

ब्रह्मचारिणी के लिए शक्कर दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। लंबी उम्र की कामना के साथ मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर, मिसरी या सफेद मिठाई का भोग अर्पित किया जा सकता है।

दूध भाता है मां चंद्रघंटा को

नवरात्र के तीसरे दिन यानी तृतीया को मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। मां के इस रूप को दूध, मेवे की खीर या दूध से बनी मिठाइयों जैसे दूध की बर्फी, रबड़ी आदि का भोग लगाया जा सकता है।

मां कूष्मांडा के लिए मालपूआ

नवरात्र की चतुर्थी को मां कूष्मांडा की पूजा होती है। मां की कृपा से मानसिक क्षमता में वृद्धि और निर्णय लेने की क्षमता में इजाफा होता है। इस तिथि को मालपूआ का भोग लगाना बेहतर होता है।

पंचमी को केला

नवरात्र के पांचवें दिन यानी पंचमी को स्कंदमाता के रूप में देवी का नमन किया जाता है। स्कंदमाता को केले का भोग अर्पण करने की मान्यता है।

कात्यायनी देवी के लिए शहद

छठे दिन कात्यायनी देवी की पूजा होती है। देवी को प्रसन्न करने के लिए मां को शहद और मीठे पान का नैवेद्य चढ़ाया जाता है। विकल्प के तौर पर शुद्ध देसी घी या मीठी दही का भी भोग लगाया जा सकता है।

गुड़ दिलाएगा मां कालरात्रि का आशीष

नवरात्र के सातवें दिन की देवी के रूप में मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस रोज शैतानी शक्ति से बचने के लिए आप मां को गुड़ का भोग लगा सकती हैं। साथ ही पान के पत्ते पर कपूर, लौंग का भोग भी लगाया जा सकता है। आप नीबू काटकर भी मां के चरणों में अर्पित कर सकती हैं।

आठवें रूप के लिए नारियल

महागौरी को हम देवी के आठवें रूप में पूजते हैं। मां के इस रूप को नारियल का भोग लगाया जाता है। इस भोग से संतान सुख की प्राप्ति होती है।

आखिरी दिन का भोग अनार

नवरात्र के आखिरी दिन हम मां सिद्धदात्रि को पूजते हैं। इस दिन सफेद तिल के लड्डू का भोग लगाया जाता है। विकल्प के तौर पर आप चावल की खीर प्रयोग में ला सकती हैं। मां को अनार का भोग लगाने से मृत्यु भय से मुक्ति मिलती है और अनहोनी नहीं होती।

जरूरी बातें

’ भोग में तुलसी के पत्ते भूल कर भी न डालें। उन्हें मुनक्का भाता है तो आप उसे हर दिन के भोग के साथ अर्पण कर सकती हैं।

’ देवी को अनार पसंद है तो प्रतिदिन उन्हें इस फल का भोग लगाया जा सकता है।

’ भोग लगाने के बाद आप उसे तीन तरह से देवी तक पहुंचा सकती हैं। पहला अगियारी यानी अग्नि में पांच ग्रास (पांच बार) भोग को अर्पण करें। दूसरा तरीका है, देसी गाय को भोग खिलाकर और तीसरा तरीका है ब्राह्मण या कन्या को भोग का दान देकर।

’ यदि किसी तिथि की हानि हो रही हो यानी वह तिथि अगले दिन सुबह न मिल रही हो तो उस परिस्थिति में सुबह और शाम के भोग तिथियों के हिसाब से अलग-अलग अर्पित किए जा सकते हैं।

 गर्भवती हैं तो व्रत के दौरान बरतें खास सावधानी

 नौ दिनों तक चलने वाले उत्सव नवरात्र की शुरुआत मां दुर्गा की पूजा और व्रत से होती है। इस दौरान घर के ज्यादातर सदस्य नौ दिनों का उपवास रखते हैं और दिन में केवल एक बार भोजन करते हैं। लेकिन यदि घर में कोई गर्भवती महिला है तो उसे पूरा दिन खाली पेट रहने से परहेज करना चाहिए। इसका मतलब यह नहीं कि इस अवस्था में उपवास बिल्कुल न रखें। लेकिन बेहतर होगा कि कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें, ताकि आपको और आपके गर्भ में पल रहे शिशु को दिन भर भूखे पेट रहने की वजह से किसी प्रकार की दिक्कत या परेशानी न हो। याद रखें कि आपके गर्भ में पल रहे शिशु को नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में पोषण की जरूरत होती है, जो वह आपके द्वारा लिए गये आहार से ही प्राप्त करता है। आपके द्वारा इस मामले में की गई किसी भी तरह की कोताही से गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत प्रभावित हो सकती है। नवरात्रों में व्रत रखना चाहती हैं तो जरूर रखिए, पर इस दौरान कुछ बातों को भी ध्यान में रखिए:

शरीर में पानी की कमी न होने दें

यूं तो हम सब को पूरे दिन में औसतन 8 से 10 गिलास पानी पीना ही चाहिये, लेकिन गर्भावस्था में व्रत के दौरान सिर्फ पानी से काम नहीं चलता, पानी के साथ-साथ छाछ, मिल्क शेक, नारियल पानी, जूस, शिकंजी और वेजिटेबल स्मूदी को अपने आहार में शामिल करें। इनसे शरीर को जरूरी खनिज और पोषक तत्व मिलेंगे, साथ ही दिन भर में शरीर के लिए जरूरी जल की मात्रा का संतुलन भी बना रहेगा।

अनाप-शनाप न खाएं

माना कि आपके लिए पूरे दिन में थोड़े-थोड़े समय के अंतराल के बाद कुछ न कुछ खाना आवश्यक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में मिलने वाला व्रत में खाने योग्य स्नैक्स दिन भर खाती रहें। यदि लंबे समय तक खाली पेट रहना आपके लिए नुकसानदायक है तो बिना सोचे-समझे कुछ भी खाते रहना फायदेमंद भी नहीं है।

न करें आराम की अनदेखी

यह न भूलें कि आप गर्भवती हैं और संतुलित आहार के साथ-साथ पर्याप्त आराम भी आपके लिए जरूरी है। इसलिए अनावश्यक भागदौड़ और ज्यादा मेहनत वाले काम से बचें। ध्यान रखें कि जब शरीर तनाव में होता है तो उसका असर पेट में पल रहे बच्चे पर भी पड़ता है। जरा-सी थकान महसूस होने पर आराम अवश्य करें, ताकि आपके साथ-साथ बच्चे को भी आराम मिल सके।

खानपान में ये बातें रखें ध्यान

’ अपने आहार में मौसमी फलों और सब्जियों की मात्रा बढ़ा दें।

’ दही, रायता या लस्सी का नियमित सेवन जरूर करें।

’ छाछ भी पी सकती हैं, इसे रात में न पिएं।

’ खीरा इस अवस्था में विशेष रूप से फायदा देता है, क्योंकि इसमें गर्भावस्था के लिए जरूरी खनिज-लवण होते हैं।

’ शकरकंद खाएं। यह बीटाकैरोटीन, आयरन और फाइबर से भरपूर होता है।

’ बादाम, अखरोट और किशमिश रात में भिगो दें और सुबह नाश्ते में एक गिलास दूध के साथ खा लें।

’ साबूदाना हल्का और सुपाच्य होता है। इससे खीर या खिचड़ी बनाकर खाएं।

’ व्रत के दौरान साधारण चावलों के सेवन का प्रावधान नहीं है, इसलिए सामक के चावल अपने आहार में शामिल करें। यह खनिज-लवणों और विटामिन से भरपूर होता है। आप सामक के आटे की रोटी या कम तेल-घी में बना पराठा भी खा सकती हैं।

’ व्रत के दौरान चौलाई का सेवन विशेष रूप से किया जाता है, क्योंकि इसमें मैग्नीशियम मांसपेशियों के तनाव को कम करता है और अन्य पोषक तत्व होने वाले शिशु को फायदा पहुंचाते हैं। पर संतुलित मात्रा में सेवन करें।

’ कुट्टू और सिंघाड़े का आटा व्रत में विशेष रूप से खाया जाता है। सिंघाड़े के आटे में विटामिन-बी, सी, कैल्शियम, आयोडीन, फास्फोरस और मैग्नीशियम बहुलता में पाया जाता है।

 इस बात का ध्यान रखें कि शरीर में नमक की कमी से चक्कर आना और बेहद कमजोरी जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। इसलिए चाहे सेंधा नमक ही क्यों न खाएं, लेकिन उसकी संतुलित मात्रा आपके आहार में जरूर शामिल होनी चाहिए।