नवरात्र से जुड़े कई विधि-विधान हैं, जिन्हें हम सालों से अपनाते आ रहे हैं। पर, क्या आप उनकी विशेषता भी जानते हैं? नवरात्र में पूजा-पाठ से जुड़ी हर चीज का एक खास महत्व है, आइए जानें उनके बारे में
नवरात्र यानी मां दुर्गा की आराधना को समर्पित खास नौ दिन। इस बार 26 सितंबर से पांच अक्तूबर तक नवरात्र हैं। इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी और नाव पर सवार होकर जाएंगी। मां की महिमा अपरंपार है। वे बहुत ही ममतामयी हैं। वो अपने भक्तों को नवरात्र के दिनों में थोड़ी-सी पूजा-पाठ का भी भरपूर फल देती हैं। सनातन धर्म में हर पर्व, हर संबंध को समय-समय पर जागृत करता रहता है। सनातन धर्म में यह व्यवस्था दो जागृत चैत्र और अश्विन नवरात्र और तो दो गुप्त नवरात्र के रूप में इसलिए विद्यमान हंै। नवरात्र से जुड़े कई विधि-विधान आप भी अपनाते होंगे। पर, क्या आप यह जानते हैं कि इनका असली महत्व क्या है? पूजा शुरू करने से पहले क्यों जौ बोया जाता है? क्यों कलश की स्थापना की जाती है या फिर मां को लाल रंग इतना प्रिय क्यों है? नवरात्र पूजन विधि से जुड़ी बातों का महत्व क्या है, आइए जानें:
जौ बोने से मिलता है शुभ फल
जौ बोना यह दर्शाता है कि अन्न ब्रह्मा है। उसे सम्मान देना चाहिए। किसानों का सम्मान करना चाहिए। समय-समय पर अन्न का दान देव गण और मनुष्यों के लिए करना चाहिए। पूजा घर में जमीन पर मिट्टी में गोबर मिलाकर मां का स्मरण करते हुए जौ बोए जाते हैं। नवमी पर जौ सफेद रंग के और सीधे उगे हों तो इसे बहुत शुभ माना जाता है। अगर जौ टेढ़े-तिरछे और काले रंग के हों, तो अशुभ फल प्रदान करते हैं। नवरात्र समाप्त होने पर इसे अन्न से भरे भंडार में रखा जाता है। यह एक तरह से नवरात्र का व्रत करने वालों की मानसिक स्थिति की प्रगति भी दिखाता है। शुभ विचारों से किया गया तप मां सदैव स्वीकार करती हैं।
क्यों करते हैं गणेश पूजा
नवरात्र में किसी प्रकार का विघ्न न हो इसलिए सबसे पहले दूर्वा, शमी, बेलपत्र और 21 लड्डू या मोदक चढ़ाकर गणेश जी की पूजा करें। गणेश विवेकी हैं और मां के आज्ञाकारी पुत्र हैं। वे प्रसन्न हो गए तो तय है कि मां भी आप पर प्रसन्न हो जाएंगी। गणेश अगर प्रसन्न हो गए तो संगीत-कला के क्षेत्र में भी आपको ख्याति प्राप्त होगी और आपको किसी वस्तु की कमी कभी महसूस नहीं होगी। रूठे रिश्तेदार खुश हो जाएंगे और आपकी जिंदगी में खुशियों का अंबार लग जाएगा। नवरात्र के दौरान हर दिन सबसे पहले किसी फल के साथ गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें। इसके अलावा नवरात्र में अपनी कुलदेवी की पूजा भी जरूर करें।
कलश स्थापना है खास
नवरात्र की पूजा की शुरुआत ही कलश स्थापना से होती है। नवरात्र में सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी से बना कलश सबसे अच्छा माना जाता है। इस बात का ध्यान रखें कि कलश में जरा-सा भी छेद नहीं हो। कलश में ब्रह्मा, विष्णु, महेश और मातृगण का वास माना जाता है। समुद्र मंथन में धन्वंतरि जी अमृत को भी कलश में ही लेकर निकले थे। ऋग्वेद में कहा गया है कि पवित्र जल से परिपूर्ण कलश देवराज इंद्र को सादर समर्पित है। कलश पर नारियल भी रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि नारियल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास होता है। भगवान शिव को भी नारियल बहुत प्रिय है।
मां को पसंद है लाल रंग
पूजा की बात हो और फूलों का जिक्र न हो यह कभी हो ही नहीं सकता। मां अंबे को लाल फूल बहुत पसंद हैं। फूल जब मां के चरणों में अर्पित होते हैं या हार के रूप में गले में पहनाया जाता है तो मां बहुत प्रसन्न होती हैं। फूल की सुंदरता और सुगंध से मां को प्रसन्न किया जा सकता है। दुर्गा की दूर्वा से पूजा नहीं करनी चाहिए। शिवजी और मां दुर्गा के प्रिय पुष्प एक जैसे हैं। आप बेला, चमेली, केसर, कमल, पलाश, चंपा, अशोक, शमी, अमलतास, बेलपत्र, कदंब, गूमा आदि फूलों से मां की पूजा कर सकते हैं। देखा जाए तो ये सब आयुर्वेदिक औषधियां भी हैं। प्रकृति में विराजमान हर वस्तु देवी को प्रिय है। जाहिर है, हमें माता की प्रिय सभी वस्तुओं की अच्छे से देखभाल करनी चाहिए और उन्हें संभालकर रखना चाहिए।
अखंड दीप का महत्व
नवरात्र में पहली पूजा के दिन जो दीप जलाया जाता है, उसे पूरे नवरात्र दिन-रात जलाकर रखा जाता है। असल में सृष्टि में सूर्यदेव जीवन और ऊर्जा प्रदान करते हैं। पृथ्वी पर अग्नि देव दीपक में प्रज्ज्वलित होकर इसका अहसास कराते हैं। जब बिजली नहीं रही होगी, तब अखंड दीपक अपने प्रकाश के माध्यम से यह सूचित करता होगा कि यहां पूजा हो रही है। प्रकाश विद्यमान है। ऐसे ही हमें सकारात्मक होकर अंधेरे को हटाना है और अच्छे विचारों का प्रकाश फैलाना है। अखंड दीपक में अग्नि देव का निरंतर वास रहता है। वैसे तो गाय के घी वाला दीपक जलाने की सलाह दी जाती है, पर आप तेल वाला दीपक भी नवरात्र में जला सकते हैं।
जौ सफेद रंग के और सीधे उगे हों तो इसे शुभ माना जाता है। अगर जौ टेढ़े-तिरछे और काले हों, तो अशुभ फल प्रदान करते हैं
अंबे पूरी करेंगी सारी मन्नतें
यूं तो कहा जाता है कि मां अंबे अपने भक्तों के थोड़े से प्रयास से भी प्रसन्न हो जाती हैं। बावजूद इसके नवरात्र के आसपास हम सब इस पशोपेश में रहते हैं कि मां दुर्गा की आराधना का सही तरीका क्या है। आइए इस संशय को दूर करते हैं और जानते हैं कि कैसे घर में भी मां की आराधना सही तरीके से की जाए
नवरात्र का त्योहार नौ दिनों तक चलता है। इन नौ दिनों में तीनों देवियों पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले तीन दिन पार्वती के तीन स्वरूपों (कुमारी, पार्वती और काली), अगले तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरूपों और आखिरी के तीन दिन सरस्वती माता के स्वरूपों की पूजा की जाती है। कैसे सही तरीके से मां अबे की आराधना, आइए जानें:
ऐसे करें पूजा
’ पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें।
’ तीन बार आचमन करें।
’ संकल्प करें।
’ कलश पूजन करने के बाद मां दुर्गा की पूजा करें।
’ कुमकुम, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
’ धूप-दीप प्रज्ज्वलित करें।
’ पंचामृत अर्पित करें।
’ नारियल और पान के पांच पत्ते अर्पित करें।
’ 5 इलायची और 5 लौंग का अर्पण करें।
’ 5 मौसमी फल चढ़ाएं।
’ पंचमेवा समर्पित करें।
’ पुष्पांजलि चढ़ाएं।
’ कन्या, बटुक कर पूजा करें।
’ कन्याओं को चुनरी दें।
’ कुमकुम का तिलक, अक्षत लगाएं।
’ फल, प्रसाद और दक्षिणा दें।
’ कलावा बांधें, उपहार दें।
’ मां की आरती करें।
’ प्रसाद वितरण कर खुद भी प्रसाद ग्रहण करें।
दुर्गा मंत्र का करें जाप
ऊँ महादुर्गायै च विद्महे
शिवपत्न्यै च धीमहि
तन्नो दुर्गा: प्रचोदयात
मां दुर्गा की आराधना के लिए इस मंत्र का 11, 28 या 108 बार जाप करें। तुलसी या चंदन की माला से जाप करें। अगर वक्त कम है तो प्रसन्न और शांत मन से ग्यारह बार जपें।
क्या करें
’ रंगोली-अल्पना बनाएं।
’ आम्रपत्रों का वंदनवार बनाएं।
’ मुख्यद्वार पर घी के दीपक जलाएं।
’ सपरिवार आरती करें।
’ प्रसाद वितरण करें।
’ भोग लगाएं।
’ भजन गाएं, स्तुति करें और कथा सुनें।
’ पवित्रता बनाए रखें।
’ स्वच्छता का ध्यान रखें।
’ प्रसन्न एवं मर्यादा में रहें।
’ कुछ समय मौन रखें।
’ आहार-विहार में संयम रखें।
क्या न करें
’ दिन में न सोएं।
’ किसी का अपमान न करें।
’ किसी को भोजन कराए बिना भोजन न करें।
’ अपनी सीमा का उल्लंघन न करें।
’ किसी का दिल न दुखाएं।
चाहिए ये पूजन सामग्री
मां दुर्गा की आराधना में कुमकुम, पुष्प, दीप, अक्षत, धूप, केले के पत्ते, आम के पत्ते, अशोक के पत्ते, नारियल, पान, सुपारी, इलायची, लौंग, जायफल, जावित्री, केसर, सुहाग की सामग्री, गोटे वाली लाल चुनरी, कलावा, मौली, पांच मौसमी फल, पंचमेवा, हलवा, खीर, पूरी, सब्जी और चना की जरूरत पड़ती है। मां अंबे का पूजन शुरू करने से पहले इन सभी सामग्री की व्यवस्था कर लें।
व्रत से पहले कर लें खुद को तैयार
नवरात्र के ये नौ दिन हमारे मस्तिष्क, शरीर, हृदय और आत्मा को स्वच्छ करने को समर्पित हैं। उपवास रखने का अर्थ है कि हम इस दौरान अस्वस्थ खानपान और नकारात्मक विचारों से खुद को मुक्त रखें। नवरात्र के इस कठिन उपवास की ओर अपने कदम तभी बढ़ाएं, जब आप इसके लिए शारीरिक के साथ-साथ मानसिक तौर पर भी तैयार हों:
चिकित्सक की मदद
नौ दिनों का उपवास हमारे शरीर के लिए आमूलचूल परिवर्तन लेकर आता है। हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है और अलग तरीके से प्रतिक्रिया भी देता है। अगर आप पहली बार नवरात्र का व्रत करने जा रही हैं तो सबसे पहले अपनी शारीरिक स्थिति को समझने के लिए चिकित्सक की सलाह जरूर लें। मधुमेह पीड़ित, गर्भवती, स्तनपान कराने वाली मां, एनोरेक्सिया (बहुत ही कम वजन) के शिकार लोगों को अमूमन उपवास से परहेज रखने के लिए कहा जाता है। उपवास रखने का निर्णय लेने से पहले इन लोगों के लिए खासतौर पर चिकित्सक के पास जाना और उनसे यह सलाह लेना जरूरी हो जाता है कि वह और उनका शरीर नवरात्र के नौ दिनों के उपवास के लिए कितना तैयार है।
पानी की न हो कमी
नवरात्र के व्रत के लिए खुद को तैयार करने में पानी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि आपके शरीर में पानी की कमी है तो शरीर खुद को व्रत के लिए तैयार करने में सक्षम नहीं हो पाता। शरीर में पानी की उचित मात्रा रहने से शरीर के सभी अंगों को सही तरीके से काम करने में मदद मिलती है। शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा का असर सेहतमंद तरीके से उपवास रखने में भी आपको नजर आएगा यानी आपको व्रत के दौरान सिर दर्द या कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। अभी से ही खूब सारा पानी, नारियल पानी, फलों का शेक आदि नियमित तौर पर पीना शुरू कर दें। ऐसा करने से शरीर व्रत के लिए पहले से तैयार रहेगा।
फिटनेस से भरपूर दिनचर्या
यह तो सबको पता होगा कि व्रत के दिनों में शरीर कठिन फिटनेस की दिनचर्या का पालन करने में असमर्थ रहता है। शरीर में ऊर्जा की कमी भी रहती है। व्रत के दिनों में आपका शरीर आध्यात्मिक जागरण की ओर चल निकलता है तो बेहतर होगा कि आप अपनी फिटनेस दिनचर्या को थोड़ा बदल लें। यदि जिम में व्यायाम करती हैं या दौड़ना आपको पसंद है तो इन दिनों योग से दोस्ती कर लें। इस तरह से आप स्वयं को मानसिक और शारीरिक तौर पर स्वस्थ रख पाएंगी।