बिहार का यह लोकपर्व भगवान सूर्य की उपासना करके मनाया जाता है। इस पर्व की दिलचस्प बात यह है कि इसमें डूबते और उगते दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। कहते हैं षष्ठी मैया अपने संतानों की रक्षा करती है और धन-वैभव में वृद्धि करती है। इसके 4 दिवसीय पर्व की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो जाती हैं। इस त्योहार पर खास तौर से ठेकुए का प्रसाद बनाकर चढ़ाया जाता है। अगर आप इस पर्व की तैयारियां कर रही हैं, तो इन चीजों का खास ख्याल रखें।
कार्तिक शुक्ल चतुर्थी में होने वाले छठ की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन घर के लोग चावल-दाल और कद्दू के बने व्यंजनों का मजा लेते हैं। बिहार में छठ का बड़ा महत्व है और यही पूजा इस प्रदेश को खास भी बनाती है। कहते हैं यह सूर्यपुत्र कर्ण की जन्मस्थली भी है। छठ की तैयारियां दिवाली से शुरू होने लग जाती हैं। ऐसे में आपको कुछ चीजों का खास ख्याल रखना चाहिए।
पूजा के लिए सबसे पहले जरूरी सामान लिस्ट बना लें
छठ की पूजा के लिए आपको क्या-क्या चाहिए उसकी एक लिस्ट बनाकर रख लें। फलों की टोकरी से लेकर मिठाइयों को पहले ही लाकर रख लें। आपको बाजार से जो भी खरीदारी करनी है वो पूजा से 3-4 दिन पहले ही कर लें। नारियल, केला, गन्ना आदि जैसी चीजों को पहले ही लाकर रख लें क्योंकि यह पूजा पर विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं।
पूजा के दिन क्या पहनना है इसे तय कर लें या नए कपड़े खरीदें
छठ पूजा में ज्यादातर महिलाएं पारंपरिक कपड़े पहनती हैं। ऐसे में इस दिन साड़ी पहनना अधिक उपयुक्त होता है। हालांकि स्टाइलिश दिखने के लिए महिलाएं सूट, शरारा आदि भी पहनती हैं। आप किसी भी तरह के एथनिक कपड़ों से खुद को स्टाइल करें, लेकिन रंगों के चयन पर विशेष ध्यान दें। छठ पूजा के दिन पीले वस्त्र धारण करना शुभ होता है। गुलाबी रंग आकर्षण, संवेदनशीलता और स्त्रीत्व से जुड़ा है। जैसा कि लाल रंग शुभ माना जाता है, गुलाबी भी लाल रंग का एक हल्का रंग है और इसलिए आप लाल के अलावा गुलाबी रंग के कपड़े भी पहन सकती हैं।
पूजा घर पर करनी है या बाहर, तय कर स्थल की तैयारी करें
अगर आप पूजा के लिए कहीं बाहर जा रहे हैं तो पहले ही स्थल की तैयारी कर लें। ऐसी जगहों पर जानें से बचें जहां बहुत ज्यादा भीड़भाड़ हो। पूजा का स्थल साफ-सुथरा होना चाहिए। जिस पानी में खड़े होकर आप अर्घ्य देंगे, वो पानी भी साफ होना आवश्यक है।
सही मुहू्र्त पर दें सूर्य को अर्घ्य
नियमपूर्वक व्रत न करने से छठी मैया और सूर्य देव का आशीष प्राप्त नहीं होता है और व्रत भी निष्फल हो जाता है। छठ पूजा का व्रत संतान प्राप्ति, उसकी सुरक्षा तथा सफल जीवन के लिए किया जाता है। पूजा के सही मुहूर्त पर ही सूर्य को अर्घ्य देने से आपके कार्यों में सफलता मिलेगी।