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दीपावली पर अपने बच्चों को देश की सांस्कृति परंपरा से जोड़ें




दीपावली भारता का सबसे बड़ा त्योहार है। यह हमारी अनूठी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दीपावली अमावस्या की रात को दीये जलाकर मनाई जाती है। इस दिन सभी के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली दस्तक देती है। हर साल बच्चे दीपावली का इंतजार इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें पटाखे जलाने होते हैं, लेकिन इस बार उन्हें इस त्योहार के और करीब लाएं। उन्हें दिवाली के बारे में कुछ खास बताएं।

दिवाली भारत का वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है - अंधकार पर प्रकाश की विजय, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाने का समय। भारत भर में विभिन्न धर्मों के एक अरब से अधिक लोगों और इसके प्रवासी लोगों के बीच व्यापक रूप से मनाया जाता है , दिवाली के पांच दिन प्रार्थना, दावतों, आतिशबाजी, पारिवारिक समारोहों और धर्मार्थ दान द्वारा चिह्नित होते हैं। कुछ के लिए दिवाली एक नए साल की शुरुआत भी है।

दिवा चमकीले जलते हुए मिट्टी के दीयों के लिए जानी जाती है, जो जश्न मनाने वाले अपने घरों के बाहर लाइन में लगते हैं।

इस त्योहार की तिथियां हिंदू चंद्र कैलेंडर पर आधारित होती हैं , जो हर महीने चंद्रमा को पृथ्वी की कक्षा में ले जाने के समय को चिह्नित करता है। अश्विन और कार्तिका के हिंदू महीनों के बीच अमावस्या के आगमन से ठीक पहले दिवाली शुरू होती है - जो आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर के अक्टूबर या नवंबर में आती है।

बच्चों को दिवाली की पौराणिक कहानी सुनाएं

दिवाली हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक त्योहार है, लेकिन जैन, सिख और बौद्धों के बीच भी इसे धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान राम 14 साल का वनवास पूरा कररके अयोध्या लौटे थे। 21 दिन रावण से युद्ध कर, उसे मारने के बाद दीयों और रौशनी के साथ भगवान का स्वागत किया गया था। इसी तरह कहा जाता है कि इस दिन भगवान धनवंतरि ने भी अवतार लिया था। अपने बच्चों को आप भी यह कहानियां सुनाएं, ताकि वह अपनी संस्कृति के करीब हों। दिवाली से जुड़ी कई पौराणिक कहानियां आपको मिलेंगी, जिन्हें आप अपने बच्चों के साथ साझा कर सकते हैं।

दीपावली से जुड़ी खरीदारी के लिए बाजार साथ ले जाएं

दीपावली की खरीदारी करने के लिए इस बार अकेले न जाएं, बल्कि अपने बच्चों को भी साथ लेकर जाएं। ऐसे में बाजार का माहौल भी बड़ा रंगीन होता है। आपके बच्चे बाजार में दीपावली की खरीदारी के जाएंगे तो उन्हें भी अच्छा लगेगा। खील-बताशे, कपड़े, पटाखे, लाइट्स आदि उन्हीं के साथ या उनसे पूछ कर खरीदें तो वह इसमें ज्यादा सम्मिलित भी होंगे।

त्योहार से जुड़ी एक-एक गतिविधि में शामिल करें

दीपावली में घर को सजाने से लेकर शाम की आरती तक में आप अपने बच्चों को शामिल करें। मंदिर की सफाई और सजावट का काम उन्हें सौंपें या फिर उनके साथ आप भी इस काम में लग जाएं। शाम को आरती में उन्हें सबसे आगे करें और जब दीया जलाएं तो उन्हें दीया ले जाकर सजाने को कहें। रंगोली बनाते वक्त उनकी मदद लें और इससे जुड़ी सारी जरूरी गतिविधियों में उन्हें शामिल करें।

पांरपरिक परिधान पहनाएं

इन ट्रेडिशन्स के सही मायने तभी होंगे जब आप इन्हें दिल से फॉलो करेंगे। त्योहार के मौके पर पांरपरिक रूप से तैयार हो जाएं। अपने बच्चों को भी उसी तरह से तैयार करें। बेटे को कुर्ता पजामा पहनाकर तैयार करें और अपनी बिटिया के लिए सुंदर सा लहंगा चोली लाएं।

बच्चों के साथ त्योहार मनाएं

कोई भी त्योहार बिना परिवार के अधूरा है। कोशिश करें कि आप सब साथ हों। अपने बच्चों के साथ हंसते-खेलते इस त्योहार को मनाएं। उनके साथ दीये जलाएं और रंगोली बनाएं। पटाखे चलाते वक्त उनके साथ रहें।